गोरखपुर ने कोरोना महामारी की दूसरी लहर का सामना डट कर किया। यहाँ अप्रैल से मई के बीच भारी मात्रा में केसेस सामने आए जिनमें अधिकतर संख्या गोरखपुर के ग्रामीण क्षेत्रों की थी। अब केस में कमी आ रही है। दूसरी लहर के लिए डेल्टा वैरिएंट को जिम्मेदार बताया गया और इस दौरान ग्रामीण इलाकों में कोरोना महामारी को ले कर कई मिथक सामने आए। लोग कोविड पीड़ित से अछूत जैसा बर्ताव करके उन्हें अलग थलग छोड़ने लगे तो रोगी अपने लक्षणा को छुपा अनजाने ही बीमारी को संक्रामक बनाते गए । अब तीसरी लहर की भी आशंका सितंबर और अक्टूबर में जताई जा रही है जिसके लिए डेल्टा प्लस वैरिएंट की प्रभावी भूमिका होगी। सवाल यह है कि कैसे इस महामारी पर लगाम लगाई जा सकती है। चार तत्व हैं जो एक नई लहर के निर्माण की ओर ले जाते हैं। यदि हम वायरस को रोकना चाहते हैं, तो हमें सभी चार बिंदुओं पर इसका मुकाबला करने का प्रयास करना चाहिए। व्यवहार : वायरस में फैलने की क्षमता होती है। अवसर : 'अवसर', जो हम वायरस को संक्रमित करने के लिए देते हैं।…
कोरोना की तीसरी लहेर: बहुमूलिया जानकारी !